आज आये है मेरी कमान में


दोस्तों इन पंक्तियों को मैंने ९/१०/२००८ को अपने कॉलेज के समय लिखा था ! क्यूंकि अब मैं अपने ब्लॉग और व्लोग्स पर ध्यान केन्द्रित कर रहा हूँ तो सोचा क्यूँ न ये आपके ये साझा करूँ ! आज कल तो लिखना छोड़ रखा है दरअसल लिखने के लिए पढना और निरंतर पढना भी जरुरी होता है ! दोनों ही नहीं हो पा रहे है फिर भी अगर आपको पसंद आये तो आप इसे लाइक ,और शेयर करना ना भूले ! 😎😎😎😎😎


लड़खड़ाते हुए अक्षर 
आज आये है मेरी कमान में 
कह जाते हो जिंदगी 
जैसे मेरी जबान में

टेढ़े-मेढ़े अक्षरों की माला 
कुछ बतानी चाहती हो 
अपने बारे में 
और कुछ जानना चाहती हो हमें 
याद कर रहा हूँ कुछ लम्हे 
कुछ बातें पुरानी सी 
कुछ यादें थोड़ी ताज़ा सी 
शब्द मिलते नहीं जब 
सताती है यादें 
कहती है अपनी आप बीती सी

लिखने बैठा हूँ आज उन्हें
माला में पिरोऊंगा ऐसे 
जैसे बादल  आया हो सावन में 
लड़खड़ाते हुए अक्षर 
आज आये है मेरी कमान में


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